असली हिसाब

कबीर तम्बुओं में लगे एक स्कूल के पास से ग़ुजर रहा था| एक ख़स्ता हाल तम्बु के नीचे बैठे बच्चें को एक मास्टर ने हिसाब पढ़ाते हुए सवाल किया- “अगर […]

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Two poems by Uday Prakash

वसंत रेल गाड़ी आती है और बिना रुके चली जाती है जंगल में पलाश का एक गार्ड लाल झाड़िया दिखाता रह जाता है   Spring      Train is coming […]

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