केदारनाथ सिंह – बाज़ार

बाज़ार – केदारनाथ सिंह ‘आओ बाज़ार चलें’ उसने कहा ‘बाज़ार में क्या है’? मैंने पूछा ‘बाज़ार में धूल है’ उसने हंसते हुए कहा| एक अजीब-शी मिट्टी की चमक उसके हँसने में […]

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तितली, गांधीजी, दुआ – तीन उदय प्रकाश से

उदय प्रकाश, अबूतर कबूतर, २००५, स्वर्ण जयंती, दिल्ली तितली सरकार एक तितली पकड़ना चाहती है, उसे चाहिए एक फूल बैजयन्ती का | सरकार को एक टमटम चाहिए वह हवा खाने […]

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असली हिसाब

कबीर तम्बुओं में लगे एक स्कूल के पास से ग़ुजर रहा था| एक ख़स्ता हाल तम्बु के नीचे बैठे बच्चें को एक मास्टर ने हिसाब पढ़ाते हुए सवाल किया- “अगर […]

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