घर – उदय प्रकाश / Home – Udhay Prakash

घर

वह बहुत देर से नकशे को देख रहा था |  फिर उसने वह नदी खोज निकाली जो उसके घर के पास से बहती थी |  फिर उसने वह पहाड़ भी खोज निकाला जो उसके घर से मुश्किल से तीन किलोमीटर दूर था और जहाँ गर्मियों में वह चारा तोड़ने जाता था |
यहाँ, इस जगह पर कहीं घर होना चाहिए |  उसने नक्शे पर एक जगह पेंसिल की नोक राखी |
तभी उसने ध्यान दिया—नक्शा जिस देश का था, वह वर्षों पहले खत्म हो चुका था |


उदय प्रकाश, …और अंत में प्रार्थना, वाणी प्रकाशन, २०१०, प७२#

Home

He was looking at a map from very far away.  He found the river which drifted by his house.  Then he found the mountain too, hardly three kilometres from his house, and the place where in summers he used to break fodder.
Home should be somewhere around this place, here.  He marked a place on the map with the tip of a pencil.
Only then he realised—the country on the map was gone many years ago.

Udhay Prakash, …and in the end blessing, Vaani Prakaashan, 2010, p72

physio-drain

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