तितली, गांधीजी, दुआ – तीन उदय प्रकाश से

उदय प्रकाश, अबूतर कबूतर, २००५, स्वर्ण जयंती, दिल्ली तितली सरकार एक तितली पकड़ना चाहती है, उसे चाहिए एक फूल बैजयन्ती का | सरकार को एक टमटम चाहिए वह हवा खाने […]

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असली हिसाब

कबीर तम्बुओं में लगे एक स्कूल के पास से ग़ुजर रहा था| एक ख़स्ता हाल तम्बु के नीचे बैठे बच्चें को एक मास्टर ने हिसाब पढ़ाते हुए सवाल किया- “अगर […]

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Two poems by Uday Prakash

वसंत रेल गाड़ी आती है और बिना रुके चली जाती है जंगल में पलाश का एक गार्ड लाल झाड़िया दिखाता रह जाता है   Spring      Train is coming […]

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Visible Cities

I’m reading Latour and Hermant’s Paris: Invisible City (2006) & De Boeck and Plissart’s Kinshasa: Tales of the Invisible City (2004) in parallel at the moment.  Both are urban ethnographies produced in collaboration […]

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